चेहरे पर मुस्कुराहट है तो आप है। एक मुस्कान सौ समाधान ब्रह्मा कुमार नारायण भाई
चेहरे पर मुस्कुराहट है तो आप है। एक मुस्कान सौ समाधान
ब्रह्मा कुमार नारायण भाई
अलीराजपुर
, मुस्कुराहट जीवन की अमूल्य निधि है। यद्यपि वह खरीदी नहीं जा सकती है ना उधार दी जा सकती है, ना चुराई जा सकती है क्योंकि जब तक यदि दी नहीं जाती तब तक किसी के कुछ काम की नहीं होती है। फिर भी यह न भूलें कि यह देने से समाप्त नहीं होगी बल्कि बढ़ेगी ही। यह आपके अपने अधिकार की वस्तु है जब चाहे तब दे सकते हैं। यदि कुदरत ने सौंदर्य कम दिया है तो मिलने वालों से मुस्कुरा कर बातें करना सीख जाइए मुस्कान सौंदर्य की कमी को पूरा ही नहीं करेगी अपितू नया सौंदर्य पैदा कर देगी ।ईश्वर प्रदत सभी शारीरिक भंगीमाओ में श्रेष्ठ मुस्कुराता हुआ चेहरा सबको अच्छा लगता है। रोते हुए चेहरे को कोई पसंद नहीं करता ।
यह विचार महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में इंदौर से पधारे मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के धार्मिक प्रभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने शहर के गणमान्य नागरिकों को *एक मुस्कान सौ समाधान विषय* पर संबोधित करते हुए बताया। मुस्कुराहट सारे वातावरण में चमक ला देता है ।चार व्यक्ति गुमसुम बैठे ,किसी के मुख पर मुस्कुराहट नहीं ,तो क्या रसआएगा उनसे मिलने में। परंतु एक व्यक्ति मुस्कुराता हुआ आता है मुस्कान के साथ ,एक बात ऐसी छेड़ देता है कि सारा वातावरण ही बदल जाता है ।वास्तव में मुस्कुराहट वह चीज है जो आपसे लेती कुछ नहीं ,देती बहुत है ।इसमें एक पैसा भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसे पाने वाले निहाल हो जाते हैं पर इसे देने वाले दरिद्र नहीं होते। एक अमेरिकन धनपति से उनकी सफलता का राज पूछा गया तो वह बोले मेरी सफलता का एक ही रहस्य वह मेरी मुस्कुराहट। मैं हर हाल में मुस्कुराता रहता हूं यह नहीं कि मेरे जीवन में मुसीबत कभी ना आई हो, मुसीबत मेरे पास भी आई, उसने मुझे खाली कर दिया मेरी करोड़ों की संपत्ति समाप्त हो गई ।मेरा व्यापार चौपट हो गया ,मुसीबत ने मेरा सब कुछ छीन लिया। किंतु मेरे मन की प्रसन्नता मुस्कुराहट छीन नहीं सकी। इसीलिए मेरे सामने पराजित होना पड़ा और मेरी संपत्ति भी लौट आई। मुस्कुराहट सजे सजाए घर के समान है। मनुष्य को रोने के लिए नहीं बनाया गया मुस्कुराने के लिए बनाए गया। देखिए अगर आपके मन में मुस्कुराहट है तो वही आपके चेहरे को दमकाती रहेगी। प्रकृति को देखिये, जो हमेशा फूलों ,हरी पत्तियों चांद सूरज के जरिए मुस्कुराती है। तो फिर हम क्यों नहीं मुस्कुराते हुये अपने जीवन को सुखी बनाते हैं ।आप स्वयं सर्वशक्तिमान की संतान है ।परम शक्ति कि आप सर्वश्रेष्ठ रचना है ।आप में वह हुनर मौजूद है जो स्वयं परमात्मा द्वारा प्रदत है।किसी ने ठीक कहा, रो-रोकर मत कर यहां दुःख को और विराट, मुस्कान का मंत्र ही है हर दुख की काट। कार्यक्रम के अंत में अरुण गहलोत ने सबका आभार प्रदर्शन किया।