*आप की अपेक्षा से कई गुना अधिक भगवान देता है, आपके अच्छे बुरे कर्म ऊर्जा के रूप में आपको अनुभव कराते हैं --ब्रहमा कुमार नारायण भाई*
*आप की अपेक्षा से कई गुना अधिक भगवान देता है, आपके अच्छे बुरे कर्म ऊर्जा के रूप में आपको अनुभव कराते हैं --ब्रहमा कुमार नारायण भाई*
अलीराजपुर
हम अक्सर यह शिकायत करते हैं, अधिकतर अपने रिश्तेदारों व बच्चों से कि हम उन्के लिए इतना करते हैं फिर भी वो हमें समझते नहीं उनकी अपेक्षाएं हमसे दिन व दिन बढ़ती ही जाती हैं क्या उनको समझ नहीं आता कि हम कैसे दौर से गुजर रहे हैं हमें कितना कष्ट है हम पर कितना भार है कितनी जिम्मेवारी है!
अज्ञान हमें ऐसे ऐसे संकल्प करने पर मजबूर करता है जबकि ज्ञान की रौशनी हर प्रश्न का उत्तर दे देती है जो कहती है कि सुख दुख उर्जा का खेल है और कुछ नहीं! आपने जो उर्जा ब्रह्मांड में जिसके प्रति भेजी है वही लौट कर आएगी, क्योंकि सब आत्मायों के संस्कार अलग अलग हैं इसलिए सबका कर्म भी अलग अलग है जो भी आत्माएं आपके परिवार सम्बंध सम्पर्क में हैं वो सब वही हैं जिनके साथ आपके कर्मों का लेन देन है, कर्म अर्थात मन वचन और कर्म से जो उर्जा आपने भेजी है वही वह आत्मा आपसे लेने और देने आई है ! यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला की प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी रोड पर स्थित ब्रहमा कुमारी सभागृह में किसी को हमारी दुख का एहसास क्यों नहीं होता है? इस विषय पर नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया कि
हम आत्मा एक शक्ति हैं और हमें महसूस भी उर्जा ही होती है, क्योंकि महसूसता की शक्ति आत्मा में है न कि शरीर में और आत्मा एक उर्जा है इसलिए वह महसूस भी उर्जा ही करती है जो हमें आ रही है दूसरी आत्मायों से उनके संकल्प, बोल और कर्मों के द्वारा !इसलिए जिस उर्जा को आज आप महसूस कर रहे हो ज़रूरी नहीं कि बाकी भी वही महसूस करें क्योंकि उनको वही महसूस होगा जो उन्होने भेजा है यदि आपके किसी विकर्म में उनमें से किसी आत्मा का हाथ है तो उसे भी आपके साथ दुख भोगना पड़ेगा पर उतना ही जितना उस विकर्म में उसका हाथ है!जैसे यदि किसी गाड़ी का दुर्घटना होता है तो सबको एक जैसी नहीं लगती किसी को ज्यादा तो किसी को कम कोई तो शरीर छोड़ देते हैं और कोई को खरोच भी नहीं आती क्यों क्योंकि किसी विकर्म में जिसका जितना हाथ उतनी ही भोगना!
इसलिए कभी किसी से शिकायत न करें और न ही किसी सहानुभूति की आशा,अपने कर्म खुद ही काटने पड़ते है, आप बीमार हैं कोई आपको हॉस्पिटल तक पहुचा सकता है यदि कोई समाजसेवी भावना वाले व्यक्ति मिले तो इसमें भी आपका भाग्य होना चाहिए, हॉस्पिटल भले ही पहुंच गए पर इंजेक्शन का दर्द तो खुद ही सहन करना पड़ेगा न! इस ब्रह्मांड में केवल एक है जो निष्काम सेवा करता है और वो है केवल भगवान, मेरा प्यारा बाबा!
किसी से कोई अपेक्षाएं न रखें केवल ईश्वर के सिवाय, वो मदद ज़रूर करता है केवल उसकी मदद में धैर्य रखना पड़ता है लेकिन जब वो मदद करेगा न तो वह आपकी अपेक्षाएं से कई कई गुणा श्रेष्ठ होगी! इसलिए उसने यहां बिठाया है जैसा बिठाया है उसमें खुश रहो किसी से न मदद और न ही सहानुभूति की आश रखो!
किसी को आपके कष्ट की वो अनुभूति नहीं हो सकती जो आपको है क्योंकि यह आपकी खेती है उनकी नहीं इसलिए काटनी भी केवल आपको ही पड़ेगी। कार्यक्रम में समाजसेवी मदन परवाल ,अरुण गहलोत, लाल सिंह, अर्जुन भाई व अन्य कई समाजसेवी उपस्थित थे।