साजिशों का दौर है हुजूर.... - fastnewsharpal.com
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साजिशों का दौर है हुजूर....

साजिशों का दौर है हुजूर....



सुरेन्द जैन

इन्हें वोटों की ख्वाहिश थी,उन्हें नोटों की ख्वाहिश थी।

मिले दोनो के दिल अंदर,एक काँधे की ख्वाहिश थी।।

मिला कांधा उन्हें ऐंसा नशे की एक ख्वाहिश थी।

बजा फिर नाम का डंका,नाम की भी तो ख्वाहिश थी।।

   इन्हें वोटों की ख्वाहिश थी,उन्हें नोटों की ख्वाहिश थी...


हुआ ऐंसा धमाका फिर,धमाके की ही ख्वाहिश थी।

रहेंगे जेल में तो क्या,नाम होगा ये ख्वाहिश थी।।

करें प्रचार फोकट में,जिन्हें कुर्सी की ख्वाहिश थी।

मिला उसको समर्थन भी,यही इनकीं भी ख्वाहिश थी।।

       इन्हें वोटों की ख्वाहिश थी,उन्हें नोटों की ख्वाहिश थी...


हैं नस से जन की जो वाकिफ,उन्हें नफरत की ख्वाहिश थी।

बंधेंगे आन खूंटे से,करें तारीफ ख्वाहिश थी।।

विरोधी हैं न वो उसके,नशाबंदी न ख्वाहिश थी।

क्या बंदरगाह हीरोइन,थी सच्चाई न साजिश थी।।

इन्हें वोटों की ख्वाहिश थी,उन्हें नोटों की ख्वाहिश थी...

एस जैन "बाड़ी"धरसीवां

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