समृद्धि और विकास के तीन साल,अधोसंरचना विकास में आई मजबूती,नवीन निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार से मिली सहुलियत - fastnewsharpal.com
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समृद्धि और विकास के तीन साल,अधोसंरचना विकास में आई मजबूती,नवीन निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार से मिली सहुलियत

 समृद्धि और विकास के तीन साल,अधोसंरचना विकास में आई मजबूती,नवीन निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार से मिली सहुलियत



गरियाबंद

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में अधोसंरचना विकास में मजबूती आई है। वर्षो से अटके हुए कई निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं। इसके अलावा निर्माण कार्यो का उन्नयन कार्य भी तेजी से हुआ है। राज्य सरकार के तीन साल पूर्ण होने के अवसर पर जिले में सड़क, पुलिया, भवन, आश्रम-छात्रावास, नहर जैसे अधोसंरचना विकास की झलक साफ दिखाई देती है। 

छात्रावास/आश्रम सर्वसुविधायुक्त मॉडल संस्था के रूप में विकसित -    



राज्य शासन द्वारा जिले में संचालित छात्रावास/आश्रमों को सर्वसुविधायुक्त आर्दश संस्था के रूप में विकसित किया गया है। प्रत्येक संस्था हेतु पर्याप्त राशि आबंटन कर जीर्णोद्धार किया गया है। जिसमें पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास गरियाबंद, प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास फिंगेश्वर, प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास फिंगेश्वर, आदिवासी कन्या आश्रम बारूका, आदिवासी कन्या आश्रम परसदाखुर्द को मॉडल के रूप में विकसित किया गया। यहां समस्त प्रकार की सुविधाएं बच्चों के लिए उपलब्ध है जिससे बच्चों के सर्वागिंण विकास में मदद मिलेगी। 



पिछड़े क्षेत्र के बावजूद औद्योगिक विकास



औद्योगिक दृष्टि से जिले के सभी विकास खंण्डों को अत्यंत पिछड़े श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद फूडपार्क की स्थापना से न केवल खाद्य प्रसंस्करण इकाईयॉं स्थापित होगी अपितु 800 करोड़ का पूंजी निवेश एवं 5600 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा, जिससे लोगों के आय में वृद्वि एवं जीवन स्तर में भी सुधार होगा। जिससे जिले का चहुमुखी विकास भी होगा। गरियाबंद जिले में कुल 103 इकाईयॉं स्थापित है, जिसमें 10917.52 लाख रूपये का निवेश हुआ तथा कुल 1071 व्यक्तियों को रोजगार मुहैया कराया गया है। 


सिंचित रकबा बढ़ाने का भागीरथ प्रयास - 



सरकार द्वारा जिले की सिंचाई क्षमता को बढ़ाने और किसनों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से जलाशयों का मरम्मत और जीर्णोद्धार प्राथमिकता से किया गया है। जिले के रानी डोंगरी जलाशय, कोरासी व्यपवर्तन, बगनई व्यपवर्तन, टेंगनाही जलाशय, सिकासार जलाशय में चेन फॉल का निर्माण और नहरों का मरम्मत और लाईनिंग कार्य से टेल एरिया में खेतों तक पानी पहुंच रहा है। 

नरवा से विकास और रोजगार -


राज्य शासन द्वारा वर्ष 2019-20 में राज्य शासन की महत्वकांक्षी ‘‘नरवा विकास योजना’’ के तहत् नदी, नालों एवं अन्य जल स्त्रोतों में वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु इनके उद्गम स्थलों से कार्य प्रारंभ कर विभिन्न जल संरक्षण कार्य अंतर्गत 05 नालों का चयन कर वर्ष 2019-20 में 3555.00 हेक्टयर तथा वर्ष 2020-21 में 13259.00 हेक्टयर कुल 16814.00 हेक्टयर वनक्षेत्र को उपचारित किया गया है। जिसमें वर्ष 2019-20 में 2847 तथा वर्ष 2020-21 में 59012 संरचना कुल 61859 संरचनाओं को निर्मित किया गया हैै, जिसमें मुख्यतः 30-40 मॉडल, कन्टूर ट्रेंच, लूज बोल्डर चेकडेम, ब्रशवुड चेकडेम, स्टापडेम, अर्दन गली प्लग, अर्दनडेम डाईक, तालाब निर्माण, गेबियन संरचना आदि सम्मिलित कार्य करवाये गये है। जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया हैं।


सोलर पंप से सिंचाई -


क्रेडा द्वारा संचालित सौर सुजला योजना के तहत विद्युतविहिन एवं दूरस्थ ग्रामों के किसानों को कृषि कार्य हेतु 95 प्रतिशत से 98 प्रतिशत के अनुदान में 2.5 लाख से 3.5 लाख रूपये के लागत मूल्य के सोलर पंपों को स्थापित किये जा रहे हैं। सौर सुजला योजना के तहत जिला गरियाबंद में कुल 7562 सोलर पंप सफलतापर्वूक स्थापित किये जा चुका है एवं 336 सोलर पंपो का स्थापना कार्य प्रगति पर है। 


सड़कों से यातायात हुआ सुलभ -जिला गरियाबंद अंतर्गत 


पीएमजीएसवाई- 1, 2, 3 के निर्माण कार्यों के माध्यम से जिला के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र एवं पहुंचविहीन ग्रामों को सड़क के माध्यम से जोड़कर ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा में जोड़ा गया, जिससे ग्रामीणों एवं आम नागरिकों को सुलभ आवागमन के साथ समय की बचत हुई है। पी.एम.जी.एस.वाय-1 अंतर्गत कुल 192 सड़कें जिसकी लंबाई 1087.39 किलोमीटर है, का कार्य पूर्ण किया गया है, जिससे गरियाबंद जिले के 445 बसाहटे आपस में सड़क के माध्यम से जुड़ी हुई है। वर्ष 2017-18 में उन्नयन कार्य के माध्यम से पीएमजीएसवाई-2 के 05 सड़क लंबाई 76.315 किलोमीटर का पूर्ण किया गया है। वर्तमान में वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 में कुल 19 मार्ग पीएमजीएसवाई-3  अंतर्गत स्वीकृत है। जिसकी लंबाई 227.08 है। उक्त कार्य जिले के सड़कों का उन्नयन हेतु किया जा रहा है।

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