कोपरा सेवाकेंद्र में स्थानीय ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सभाहाल में उत्सव के अंतिम पर्व रंगपंचमी हर्सोल्लास पूर्ण माहौल में मनाया
कोपरा सेवाकेंद्र में स्थानीय ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सभाहाल में उत्सव के अंतिम पर्व रंगपंचमी हर्सोल्लास पूर्ण माहौल में मनाया
रंगो के जरिए से देव तत्व को महसुश करना ही रंग पंचमी पर्व का उद्देश्य ----- ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी
प्रभु प्रेम में रंगने से ही जीवन में आध्यात्मिकता का रंग चड़ेगा_____ बी.के.शीला बहन
तेजस्वी यदु/कोपरा
राजिम सेवाकेंद्र अन्तर्गत ग्राम कोपरा के स्थानीय सेवाकेंद्र में सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी कुंती दीदी के नेतृत्व में वर्ष के अंतिम उत्सव रंगपंचमी के अवसर पर स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में यादव समाज जिलाध्यक्ष गोविंद राम यादव, अगहन सिंग ठाकुर पूर्व अध्यक्ष भाजपा मंडल छुरा , सरपंच डॉली साहू , कचना धूरुवा महाविद्यालय संचालन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार साहू, गायडब्री मिडिल स्कूल के प्रधानपाठक हेमलाल यादव,सज्जन सिंग की उपस्तिथि में महाज्योती परमपिता परमात्मा शिव की याद में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में खडमा सेवा केन्द्र से पधारी ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने कहा कि हमारी संस्कृति में त्यौहारों का विशेष महत्व है। त्योहार, जीवन में सच्ची खुशियों का खजाना लेकर आती है,इसे अनुभव तभी कर सकते है जब जीवन आध्यात्मिकता से परिपूर्ण हो।उन्होंने कहा कि जितने भी रंग इस दुनिया में विद्यमान है,वे सभी किसी न किसी दैवी शक्ति का रूप है।जब हम उन रंगो से होली खेलते हैं,या हवा में उड़ाते है तो वे शक्तियां जागृत होती है।इसी तरह शरीर के सात चक्र सात रंगों से संबंधित हमारे पुराणों में वर्णित किया गया है।वहीं कहा जाता है कि सभी देवताओं के तत्व शरीर में होने से आध्यात्मिक नजरिए से साधना पूरी मानी जाती हैं।इन्हीं रंगो के जरिए से देव तत्व को महसूस करना ही रंग पंचमी पर्व का उद्देश्य है।
जिला अध्यक्ष गोविंद राम यादव ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में मान्यता है कि रंग पंचमी पर हवा में रंग गुलाल उड़ाना चाहिए इससे निगेटिव ऊर्जा कम हो जाती है।रंगपंचमी पर उड़ाए गए रंगो से इकठ्ठा हुए सक्तियो के कण बुरी शक्तियों से लड़ते हैं। वहीं इस त्योहार पर दैवी देवताओं का आह्वान भी किया जाता है।
श्यामनगर से आयी ब्रह्माकुमारी शीला बहन ने कहा कि हम एक परमात्मा पिता के संतान है।जब तक इस परमात्म रंग में नहीं रंगेंगे ,तब तक भातृत्व भाव मन में पैदा नहीं होगा।परमात्म रंग में रंगना ही विश्व बंधुत्व की भाव को जागृत करना है।तभी हम परमात्मा पिता के संग में होकर जीवन के रंगो का आंनद ले पाएंगे।उन्होंने बताया कि होली का अर्थ ही होता है , हो - ली अर्थात् हम आत्मा परमात्म की होली।इसी प्रकार प्रभु के रंग में रंगने से ही जीवन में आध्यात्मिकता का रंग चड़ेगा।
आगंतुक सभी अतिियों ने अपने जीवन के अनुभवों का रंग सभी को लगाए।कोपरा नगर वासियों में बड़े - बुजुर्गो ने खूब नगाड़े बजाए, फाग गीत,डंडा नृत्य,रंग गुलाल से सराबोर रंग पंचमी का पर्व मनाया।इस अवसर पर कोपरा ग्राम के वरिष्ठ जन आस पास के गांव के संस्था के सदस्यगण माताएं बहनें बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।बी.के पूजा बहन,बी के हेमा बहन, बी के सरोज बहन, बी के लेखनी बहन जी ने सभी के साथ फूलों से होली खेली एवं सभी का मुख मीठा कराए।



