*वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर संत सम्मेलन गीता ज्ञान द्वारा खुशनुमा भारत
*वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर संत सम्मेलन गीता ज्ञान द्वारा खुशनुमा भारत
अलीराजपुर*
अपने को श्रेष्ठ व खुशनुमा बनाना है नर से मानव व मानव से मानव व मानव से देवता बनना है तो उसका आधार है मन। मन को साध ले। यदि मन कंट्रोल हो जाता हैं, मन सही दिशा में चलने लगता है , मन सकारात्मक विचार से परिपूर्ण बन जाता है जीवन खुशनुमा बन जाती है। यह विचार ब्रहमा कुमारी के द्वारा आयोजित वर्ल्ड हैप्पीनेस दिवस के अवसर पर गीता ज्ञान के द्वारा खुशनुमा भारत , सम्मेलन में नगर वासियों को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार के संत संतोष वर्मा जी ने बताया।
इस अवसर पर माननीय वक्ता महाराज घनश्याम दास जी ने बताया कि बच्चों के संस्कार में माताएं विशेष रोल निभाती है। बच्चों में विदेशी संस्कार डालना है अंग्रेजी पढ़ानी है त माता चाहती है कि मेरा बच्चा शिशु मंदिर में पढ़े, तो अवश्य डालती है। हम अपनी मातृभाषा को छोड अंग्रेजो के संस्कार डालते हैं। तो मातृशक्ति जो चाहेअच्छे बुरे संस्कार डालने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।जब मातृशक्ति आगे आ जाती है तोभारत स्वर्ग बन जाता है। इंदौर से पधारे धार्मिक प्रभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने बताया कि गीता में वर्णित है काम विकार नरक का द्वार है। पवित्रता ही सुख शांति की जननी है ।परमात्मा को पतित पावन के रूप में बुलाते हैं ।पवित्रता के बल से ही हम अपने जीवन को खुशनुमा व अन्य आत्माओं को भी बना सकते हैं। मुख्य अतिथि के रुप में भ्राता जितेंदर तवर ने बताया कि गीता में बताया गया सांख्य योग अर्थात कण-कण में भगवान है। हमारे संपर्क में जितने भी मानव आते है इसमें भगवान के दर्शन करना चाहिए। दूसरा कर्मयोग अर्थात कर्म किए जा फल की इच्छा न करना है। तभी हम अपने जीवन को खुशनुमा बना सकते हैं। पवित्रता के भाव से प्रभु के दर्शन करें तो जीवन सफल हो जाता है।वीडियोसेवा केंद्र संचालिका कुमारी माधुरी बहन ने बताया कि अपने मन वचन कर्म से किसी को दुख नहीं देना, सुख देंगे तो सुख मिलेगा जिससे जीवन खुशनुमा बन जाता है ।किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं करना है। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रजवलन करके किया गया। कार्यक्रम के बाद शिव का ध्वजारोहण सभी संत महात्माओं ने मिलकर किया।


