जल जन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में नई ताकत मिलेगी--ब्रह्माकुमार नारायण भाई
जल जन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में नई ताकत मिलेगी--ब्रह्माकुमार नारायण भाई
अलीराजपुर
जल जन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में नई ताकत मिलेगी, ब्रम्हाकुमारी और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाया जाएगा अभियान। ब्रह्माकुमारीज के 5000 सेवा केंद्र के माध्यम से 10करोड़ लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाने का लक्ष्य-ब्रह्माकुमार नारायण भाई
मनुष्य और मनुष्यता को बचाने के लिए जल संरक्षण की दिशा में जल जन अभियान एक सकारात्मक पहल है। लोगों में जल व प्रकृति के संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना का निर्माण करके ही जल संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। जल हमारे यहां वर्षों से हमारी भावना में आध्यात्मिक धर्म का हिस्सा है इसीलिए हम जल को देव की संज्ञा देते हैं, प्रकृति को मां मानते हैं। आज भविष्य की चुनौतियों के समाधान खोज रहे हैं तो हमें अतीत की चेतना को भी उन्हें जागृत करना होगा। ब्रह्माकुमारीज के 5000 सेवा केंद्रों के माध्यम से 10 करोड लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है ।यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने दीपा की चौकी पर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में जल जन अभियान के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर कहा। इस अवसर पर भ्राता दिनेश जी देवड़ा न्यायाधीश अलीराजपुर ने कहा की जल मनुष्य जानवर प्रकृति के लिए महत्वपूर्ण है। प्रकृति में 75 परसेंट पानी है फिर भी पीने के जल की कमी है इसके कारण को ढूंढना चाहिए। आज की भागदौड़ वाली जीवन में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। प्रकृति हमारी सदियों से सेवा करती आई है। यह समय है प्रकृति के प्रति सजग रहने का। इस अवसर पर पंकज राठौड़, विकासखंड समन्वयक ,अभियांत्रिकी विभाग ने कहा की बरसात के पानी जब गिरता है तो शहरो मैं रोड से बहकर चला जाता है उस पानी के बहाव को रोककर जल संरक्षण के कार्य में महान भागीदारी हासिल कर सकते हैं। तीसरा युद्ध होगा तो पानी के लिए होगा। शासन का अपना प्रयास है लेकिन हमें अभी से ही भविष्य के लिए आज ही सोचना होगा। हमें अपने शुरुआत अपने शहर से करनी होगी। स्वच्छता अभियान जब शुरू किया तो आज जन आंदोलन बन गया इस तरह जल को भी जन आंदोलन बनाना होगा। माननीय वक्ता अनूप शर्मा एडवोकेट ने कहा पहले हमें अपने घरों से शुरुआत करनी है घरों के बाहर नलों से व्यर्थ पानी लाखों लीटर में बहता रहता है। यह भी एक पाप है । पानी को रोकने की दिशा में हम अपने स्तर पर आज से शुरुआत करें। डॉ प्रमेय रेवडिया जी ने बताया कि जब शासन के साथ संत जुड़ जाते हैं तो समाज जुड़ जाता है। मां नर्मदा के कारण निमाड़ का पूरा क्षेत्र सिंचित हो रहा है। पश्चिम के देश जल को साधन के रूप में तो पूर्व के लोग जल को देवता के रूप में मानते हैं, पतित पावनी मां गंगा के रूप में देखते हैं। यह हमारी भारतीय संस्कृति है ,तो जल को देवता के रूप में माने तो यही जल हमारे जीवन में आरोग्यता पैदा करेगा। कार्यक्रम के अंत में सीताराम व्याख्याता शासकीय महाविद्यालय ने सभी से हाथ खड़ा करके प्रतिज्ञा कराई कि मैं जल का विवेकपूर्ण उपयोग करूंगा इस बेशकीमती खजाने को बर्बाद नहीं करूंगा ।कार्यक्रम का संचालन सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन ने किया उन्होंने जल जन अभियान का उद्देश्य बताते हुए बताया कि संस्था बावड़ी व विभिन्न जलाशयों को गोद लेकर उनका झीणोद्वार करेंगे। पौधारोपण और किसानों को स्प्रिंकलर के लिए प्रेरित करेंगे। पूरे शहर में जल संरक्षण के लिए जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ।स्कूल कॉलेज में निबंध एवं वाद विवाद प्रतियोगिता के साथ आयोजन करने का लक्ष्य है। राजयोग मेडिटेशन द्वारा लोगों में सकारात्मक चेतना उत्पन्न करना। कार्यक्रम के अंत में ब्रम्हाकुमारी सेना बहन ने सभी का आभार व्यक्त किया।


