नगरी -आदिवासी महिलाएं लघु वनोपज का सही दाम नही मिलने से कोचियों के हाथों बेचने मजबूर
नगरी -आदिवासी महिलाएं लघु वनोपज का सही दाम नही मिलने से कोचियों के हाथों बेचने मजबूर
जयलाल प्रजापति /नगरी
.छत्तीसगढ की प्रमुख वनोपज मे से एक सरई के बीज संग्रहण का काम जंगल मे आदिवासी महिलाओं ने शुरू कर दिया है...भीषण गर्मी के साथ जंगली जानवरो के डर के बीच धमतरी जिले के वनाचंल मे बसे ग्रामीण सरई के बीच का संग्रहण कर रहे है....हालाकि बीच का सही मूल्य नही मिल रहा है...जितनी इस बीज संग्रहण मे इनकी मेहनत है....उसके मुताबिक इनको भुगतान नही किया जा रहा है....ऐसे मे ग्रामीण सरई की बीज को कोचियो के हाथो बेचने मजबूर हो रहे है.......
.दरअसल छत्तीसगढ जन जातीय प्रधान राज्य है...ये आदिवासी जंगलो पर निर्भर रहते है...इनके लिए जंगल जीवन जीने का सहारा है....जंगलो से आदिवासी कई दशको से लघु वनोपज इक्कठा करते आ रहे है....लेकिन का उनका मेहनत के हिसाब दाम नही मिलने से सरकार के समर्थन मूल्य का लाभ लेने के बजाय कोचियो के हाथो बेचना पड रहा है...इन दिनो वनाचंल के जंगलो मे साल सरई के बीच अधिक मात्रा मे गिर रहे है....जिसे ग्रामीण आदिवासी महिलाए सुबह से संग्रहण करने जाती है....संग्रहण करने वाली महिला की मानें तो इस बीज को तैयार करने मे काफी मेहनत करनी पडती है...जंगल से बीज इक्कठा करके इसे सुखाना पडता है....फिर जलाकर दलना पडता है...इस पूरे प्रोसेस मे 15 दिनो का वक्त लगता है...तब जाकर ये बीज बेचने योग्य बनता है....इसके बाद बीज बिचौलियो के पास ये ग्रामीण महिलाएं बेचने ले जाते है....साल सरई के बीज व्यापारी और बिचौलिए 15 से 20 रू प्रति किलो की दर से खरीदते है...सरकार ने इसके लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किए है....लेकिन सही दाम नही मिलने की वजह से ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे है.....वही नगरी जनपद अध्यक्ष दिनेश्वरी नेताम भी अपने जंगल मे सरई बीज संग्रहण कर रही महिला को देखकर आप को रोक नही पाई और सरई बीज संग्रहण कर रही महिला का हाथ बटाने जंगल पहुच गई....उनकी माने तो...आदिवासी लोग सरई बीज का उपयोग पहले अन्न की कमी के चलते भोजन के रूप मे करते थे...और इसका तेल के साथ साबुन,दवाई,के रूप मे भी उपयोग किया जाता है...वही दिनेश्वरी नेताम ने सरकार के समर्थन मूल्य के खरीदी को निर्धारित नही करने की मांग कर रहे है.......संग्रहण करने वाली महिला .कुमारी बाई .ने कहा .
एफ आर कोसरिया उप प्रबंध संचालक जिला वनोपज धमतरी..ने कहा .वही जंगली उत्पादो को खरीदने की जिम्मेदारी वन विभाग की होती है....इसके लिए विभाग वनोपज संघ का गठन किया गया है...जो इस तरह के वन उत्पादो की खरीदी करती है...इस साल इसके लिए लक्ष्य निर्धारित किया जाता है...साथ ही एमएसपी का भी निर्धारण होता है...जिले मे इस बार विभाग ने 12000..क्विटंल साल बीज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है...जो 15 समिति के माध्यम से स्व साहयता समूह की महिला के द्धारा खरीदी की जाती है..जिसकी खरीदी 15 मई से 15 जुन तक करनी है...अफसर की माने तो इस साल सरई बीज की फसल अच्छी है...शासन की ओर से एमएसपी ग्रेड ए की खरीदी 20 रू प्रति किलो दर है....ग्रेड बी की खरीदी 18 रू प्रति किलो की खरीदी है..........
.बहरहाल भीषण गर्मी के बीच जंगल मे रहने वाले आदिवासी ग्रामीण महिला सरई बीज संग्रहण करने मे जुटी हुई है....ताकि अपने परिवार का भरण पोषण कर पाए...लेकिन उनकी मेहनत के हिसाब से उनकी सही दाम नही मिलने की वजह से कोचियो के हाथो बेचने को मजबूर हो रहे है...ऐसे मे सरकार को सरई बीज के समर्थन मूल्य को ग्रामीण महिलाओ के मेहनत के हिसाब से बढाना चाहिए....ताकि उनकी मेहनत का दाम मिल सके......।
