*अनोखा मामला श्रवण बाधित शिक्षक की अनोखी कहानी, नौकरी शुरू करने के बाद आजतक कभी नही पढ़ाई कक्षा*
अनोखा मामला श्रवण बाधित शिक्षक की अनोखी कहानी, नौकरी शुरू करने के बाद आजतक कभी नही पढ़ाई कक्षा
अजीत सिंह,बिलासपुर
2015 से समाज कल्याण विभाग के संचालनालय में काम कर रहे श्रवणबाधित शिक्षक की वापसी जिला पुर्नवास केन्द्र डीआरसी बिलासपुर हो गई है। 2015 से 2020 तक उसका वेतन डीआरसी से ही निकला। आश्चर्यजनक बात है कि श्रवणबाधित शिक्षक के रूप में जब से इस कर्मचारी की शासकीय सेवा शुरू हुई है तब से आज तक महानुभाव ने कभी भी कहीं भी श्रवण बाधित छात्रों को नही पढ़ाया। समाज कल्याण के नीति धारकों को जाने क्या हो गया है या इस शिक्षक में ऐसी कौन सी विशेषता है कि उसे उसके मूल काम से दूर रखा जाता है। डीआरसी में श्रवणबाधित शिक्षक के लिए कोई काम नही है और शिक्षक ने 3 अक्टुबर को ज्वाईन दी तब से वह पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग में ही घुमता पाया जाता है, और यही पर समाज कल्याण विभाग का जिला कार्यालय स्थापित है। सुत्र बताते है कि उक्त श्रवण बाधित शिक्षक शासकीय कर्मचारी से ज्यादा विभागीय काम काज में दलाली के लिए विख्यात है। गौरतलब है कि समाजकल्याण विभाग में निःशक्त स्त्रोत संस्थान जैसे करोड़ों के घपले के बाद भी रवैया नही बदला है। अधिकारी और कर्मचारी उच्चत्म न्यायलय से स्थगन आ जाने के बाद फिर से पुराने ढर्रे पर चल पड़े है।
