आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..12-02-2021*..🎋


✍🏻गुस्से में आप खुद को भी नहीं संभाल सकते लेकिन प्रेम से आप पुरी दुनिया को संभाल सकतें है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻निरंतर अभ्यास हमें बलवान बनाता हैं, दुःख हमें इंसान बनाता हैं, हार हमें विनम्रता सिखाती हैं, जीत हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, लेकिन सिर्फ़ विश्वास ही है जो हमें आगे बढने की प्रेरणा देता है।

🌹 *σм ѕнαитι.*

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अनमोल वचन :


यदि हम अपने देखने के दृष्टिकोण को बदल ले तो बाहर सब कुछ अच्छा और सुन्दर नजर आएगा। जैसा हम स्वयं होते हैं वैसा ही हमें  नजर आता है।जैसा आँखों पर चश्मा लगा होगा बैसा ही नजर आने लगेगा।संसार में बहुत लोगों को केवल बुराईयाँ, दोष,गंदगी और गलत चीजें ही नजर आती है। यह सब उनकी ग़लत धारणा के कारण होता है। संसार में अच्छे,सज्जन,सत्कर्मी और श्रेष्ठ लोग भी बहुत हैं। धरती पर कई लोग तो ईश्वर का चिन्तन करते-करते तीर्थ जैसे ही हो गए हैं। दोष देखने की जगह हम सबमें गुण देखने लग जाएँ तो हमारा खुद का विकास तो होगा ही और दुनिया भी बड़ी खूबसूरत नजर आने लगेगी ......


🙏ओम् शांति🙏


🎈आपका दिन शुभ हो 🎈


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        ओम शांति                          
        *सुखी जीवन जीने का सिर्फ एक ही रास्ता है वह है अभाव की तरफ दृष्टि ना डालना। आज हमारी स्थिति यह है जो हमे प्राप्त है उसका आनंद तो लेते नहीं, वरन जो प्राप्त नहीं है उसका चिन्तन करके जीवन को शोकमय कर लेते हैं।*
         *दुःख का मूल कारण हमारी आवश्कताएं नहीं हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो कभी पूर्ण भी हो सकती हैं मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और ना ही किसी की हुईं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है।*
          *इसलिए शास्त्रकारों ने लिख दिया*
*"" आशा हि परमं दुखं नैराश्यं परमं सुखं ""*
*दुःख का मूल हमारी आशा ही हैं। हमे संसार में कोई दुखी नहीं कर सकता, हमारी अपेक्षाएं ही हमे रुलाती हैं। अति इच्छा रखने वाले और असंतोषी हमेशा दुखी ही रहते हैं।*
*हजार महफिलें हों, लाख मेले हों!*
*पर जब तक खुद से न मिलो, अकेले हो..!!*
           ॐ शांति                                                                               
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*इंसान को हमेशा ये सोचना चाहिए....*
*गलती आपकी हो या मेरी*
    *रिश्ता तो हमारा है ना...!*    
*"मुस्कुराना"* *सीखना पड़ता है...!*
*"रोना"* *तो पैदा होते ही आ जाता हैं.....*
    ॐ शांति
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🙏🌹 *जय श्री राधे कृष्णा* 🌹🙏
*जिंदगी में किसी के बारे में अच्छी बात सुनो तो बेझिझक मान लो।*
*परन्तु किसी के बारे में कोई गलत बात सुनो तो पहले उसकी सच्चाई अवश्य जान लो!!*
 🙏🌹 *आपका दिन आनन्दमय हो* 🌹🙏


🙏 *ॐ शांति* 🙏

*अच्छाई* और *बुराई* मनुष्य के कर्मों में होती है, कोई बांस का तीर बना कर किसी को *घायल* करता है... तो कोई  बांसुरी बना कर उसी बांस में *सुर* को भरता है।

🌸 सुप्रभात... 

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*👇👇 आज का प्रेरक                            प्रसंग 👇👇*🏵️


                *!! असली शिक्षा !!*

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एक बड़ी सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी, कार में ही मोबाईल से बातें करते हुए महिला ने अपनी बच्ची से कहा, जा उस बुढिया से पूछ सब्जी कैंसे दी, बच्ची कार से उतरतें ही- अरें बुढिया ! यें सब्जी कैंसे दी?

40 रूपयें किलो, बेबी जी...


सब्जी लेते ही उस बच्ची ने सौ रूपयें का नोट उस सब्जी वाली को फेंक कर दिया और आकर कार पर बैठ गयी, कार जाने लगी तभी अचानक किसी ने कार के सीसे पर दस्तक दी, एक छोटी सी बच्ची जो हाथ में 60 रूपयें कार में बैठी उस औरत को देते हुए, बोलती हैं आंटी जी यें आपके सब्जी के बचें 60 रूपयें हैं, आपकी बेटी भूल आयी हैं। कार में बैठी औरत ने कहा तुम रख लों, उस बच्ची ने बड़ी ही मिठी और सभ्यता से कहा- नहीं आंटी जी हमारें जितने पैंसे बनते थें हमने ले लियें, हम इसे नहीं रख सकतें, मैं आपकी आभारी हूं, आप हमारी दुकान पर आए और आशा करती हूं कि सब्जी आपको अच्छी लगें, जिससे आप हमारें ही दुकान पर हमेशा आए। उस लड़की ने हाथ जोड़े और अपनी दुकान लौट गयी...


कार में बैठी महिला उस लड़की से बहुत प्रभावित हुई और कार से उतर कर फिर सब्जी की दुकान पर जाने लगी, जैसें ही वहाँ पास गयी, सब्जी वाली अपनी बच्ची को पूछते हुयें, तुमने तमीज से बात की ना, कोई शिकायत का मौका तो नहीं दिया ना..?


बच्ची ने कहा, हाँ माँ मुझे आपकी सिखाई हर बात याद है, कभी किसी बड़े का अपमान मत करो, उनसे सभ्यता से बात करो, उनकी कद्र करो, क्यूंकि बड़े-बुजर्ग बड़े ही होते हैं, मुझे आपकी सारी बात याद है और मैं सदैव इन बातों का स्मरण रखूंगी। बच्ची ने फिर कहा, अच्छा माँ अब मैं स्कूल चलती हूं, शाम में स्कूल से छुट्टी होते ही, दुकान पर आ जाऊंगी...


कार वाली महिला शर्म से पानी पानी थी, क्यूंकि एक सब्जी वाली अपनी बेटी को इंसानियत और बड़ों से बात करने के शिष्टाचार का पाठ सीखा रही थी और वह महिला अपनी बेटी को छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का मन में बीज बो रही थी..!!


*शिक्षा:-*

सबसे अच्छा तो वो कहलाता है जो आसमान पर भी रहता है और जमींन से भी जुड़ा रहता है। बस इंसानियत, भाईचारें, सभ्यता, आचरण, वाणी में मिठास, सब की इज्जत करने की सीख दीजिए अपने बच्चों को, क्यूंकि अब बस यहीं पढ़ाई है जो आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगी इसे पढ़ने, इसे याद रखने, इसे ग्रहण करने में और जीवन को उपयोगी बनानें में !!


*सदैव प्रसन्न रहिये।*

*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

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