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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..02-06-2021*..🎋
✍🏻बीता हुआ हर लम्हा जिंदगी को समझने का एक अच्छा मौका है और आने वाला हर लम्हा जिंदगी जीने का दूसरा मौका।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻साँसे किसी का इंतज़ार नहीं करतीं, चलती हैं या चल देती हैं, चिंता इतनी कीजिए की काम हो जाए, पर इतनी नही की जिंदगी तमाम हो जाए, मालूम सबको है कि जिंदगी बेहाल है, लोग फिर भी पूछते हैं और सुनाओ क्या हाल है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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अनमोल वचन :
परमपिता परमात्मा ऊर्जा के परम स्त्रोत हैं,यह ऊर्जा हमें शक्तिशाली व प्रकाशवान बनाती है,आत्मा को ऊर्जावान बनाने के लिए परमपिता परमात्मा से कनेक्शन जोड़ कर अपने अंदर गुणों व शक्तियों की ऊर्जा हम सदैव खुद में भरते रहें.......
🙏ओम् शान्ति 🙏
🌸आपका दिन शुभ हो 🌸
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*02 जून:-*_ सद्गति अर्थात हम सबको श्रेष्ठ कर्मो का ज्ञान देना, ऐसे कर्म जिसमे स्नेह शक्ति और सच्चाई हो।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*ॐ शांति* 🙏🏽
*परिपक्वता इसमें नहीं है कि*
*आप कितना जानते हैं*
*या कितने शिक्षित हैं*
*बल्कि इसमें है कि आप*
*किसी जटिल से जटिल स्थिति को*
*शांति से निपटने में कितने सक्षम हैं*
*सादगी सर्वोत्तम सुन्दरता है*
*और क्षमा अतुलनीय बल है*
*नम्रता सर्वश्रेष्ठ गुण है*
*एवं मैत्री सर्वोत्कृष्ट संबंध है*
*ठंडा पानी और गरम प्रेस कपड़ों की*
*सारी सिकुड़न सलवटें निकाल देती हैं*
*ऐसे ही ठंडा दिमाग*
*और ऊर्जा से भरा हुआ दिल*
*जीवन की सारी उलझन मिटा देते हैं*
🌻 *ओम शांति* 🌻
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*लंका के रावण से ज्यादा खतरनाक है शंका का रावण*
*जो समझ और विवेक का हरण कर लेता है*
ॐ शांति
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ॐ शांति
*जीवन उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है*
*जो इसका आनंद ले रहे हैं ....*
*उन लोगों के लिए मुश्किल है*
*जो इसका विश्लेषण कर रहे हैं,और*
*उन लोगों के लिए सबसे खराब है*
*जो इसकी आलोचना कर रहे हैं....*
🙏🌹🙏🏻ॐ शांति🙏🌹🙏
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*_जिस धरनी को स्नेह का पानी मिलता है वहाँ के फल बड़े भी होते और स्वादिष्ट भी होते हैं। जैसे स्वर्ग में बड़े-बड़े फल और टेस्टी भी अच्छे होते हैं। विदेश में बड़े फल होते हैं लेकिन टेस्टी नहीं होते। फल की शक्ल बहुत अच्छी होती लेकिन टेस्ट नहीं। भारत के फल छोटे होते लेकिन टेस्ट अच्छी होती है। फाउण्डेशन तो सब यहाँ ही पड़ता। जिस सेन्टर पर स्नेह का पानी मिलता है वह सेन्टर सदा फलीभूत होता है। सेवा में भी और साथियों में भी। स्वर्ग में शुद्ध पानी शुद्ध धरती होगी। तब ऐसे फल मिलते हैं।_*🌹💥☝🏼💝
🙏 *ॐ शांति* 🙏
अगर आप किसी को नमस्कार यह सोचकर कर रहे हो कि वो भी आपको करेगा तो वो *नमस्कार* व्यर्थ है... क्योंकि नमस्कार *संस्कार* के कारण किया जाता है, *अहंकार* के कारण नहीं...
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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*💢◆ ओम शान्ति ◆💢*
_भौतिक क्षेत्र में भी यदि हमारे नेत्रों पर काला चश्मा लगा हो तो हमें सब कुछ काला ही दिखाई देगा । पीलिया के रोगी को सारे पदार्थ पीत-वर्ण के दृष्टिगोचर होते हैं । सावन के अंधे के लिए भी उक्ति प्रसिद्ध है कि उसे सब हरा ही हरा दिखता है । उसी प्रकार विकारी मनुष्य को सभी मनुष्य विकारों से परिपूर्ण ही दिखाई देंगे क्योंकि उसके नेत्रों पर विकारों का चश्मा जो लगा हुआ है ।_
_★ जब हम किसी की ओर एक उंगली उठाते हैं तो बाकी चारों उंगलियां स्वत: ही हमारी ओर उठ जाती है । यह भी सिद्ध करता है कि दूसरों में जो अवगुण हम देखते हैं वह हममें उससे चार गुना अधिक विद्यमान है । अतः आध्यात्मिक साधकों को पर-छिद्रान्वेषण न कर अवगुणों की जड़ अपने में ही खोजनी चाहिए ।_
_★ हमारा ध्येय हंस के समान बनना है । हमें मोती चुगने वाला हंस बनना है ना कि गंद खाने वाला कौवा । हंस का ध्यान मोतियों की खोज में लगा रहता है लेकिन कौवे की दृष्टि दूर से ही गंदगी पर चली जाती है । उसी तरह निर्दोष चित्त वाले व्यक्ति की दृष्टि किसी के अवगुण पर न जाकर उसके गुणों पर जाती है । लेकिन मलिन चित्त दूसरों का अवगुण ही खोजता रहेगा और कहीं किसी में रिंचकमात्र भी दिखाई देने पर प्रफुल्लित होगा और दूसरों को भी उसका अवगुण दिखाकर आनंद लेगा । वह यह नहीं जानता इस तरह वह अपने बहुमूल्य समय और जीवन को व्यर्थ ही खो रहा है तथा अपने कुसंस्कारों को और भी जटिल बना रहा है ।_
_★ पर छिद्रान्वेषण आत्मिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है । सांसारिक रूप में भी किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है । यदि वह ऐसा करता है तो स्वयं भी दंड का भागी बन जाता है ।आध्यात्मिक क्षेत्र में तो यह और भी अधिक सत्य है । सृष्टि नाटक विविधता पूर्ण है और सबके संस्कार भी अलग-अलग है ।_
_★ अतः अपने से भिन्न विचारों वाले व्यक्ति से घृणा करना भूल है । हमें यह सोचकर शांत-चित्त रहना चाहिए कि जो आत्मा जैसा कर्म करेगी ईश्वरीय विधान के अनुसार वह वैसा ही फल पाएगी । लेकिन यदि हम स्वयं किसी को दंड देने का प्रयत्न करेंगे तो हमारी आत्मिक शक्ति का भी ह्रास होगा और सुक्ष्म ईश्वरीय विधान के अनुसार हम भी तो दंड के भागी बन जाएंगे । आध्यात्मिक साधक को दूसरों का उपयोग नहीं वरन् स्वयं का अवगुण देख उससे मुक्त होने का भागीरथी प्रयत्न करना चाहिए ।_
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*☀️● OM SHANTI ●☀️*
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*👉🏿सबसे बड़ा धन 🏵️
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किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी ।
बूढ़ा बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था, चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी, चेहरा झुर्रियों से भर चूका था बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।
घर में एक चीज़ अच्छी थी कि शाम को खाना खाते समय पूरा परिवार एक साथ टेबल पर बैठ कर खाना खाता था ।
एक दिन ऐसे ही शाम को जब सारे लोग खाना खाने बैठे । बेटा ऑफिस से आया था भूख ज्यादा थी सो जल्दी से खाना खाने बैठ गया और साथ में बहु और उसका एक बेटा भी खाने लगे ।
बूढ़े हाथ जैसे ही थाली उठाने को हुए थाली हाथ से छिटक गयी थोड़ी दाल टेबल पे गिर गयी ।
बहु बेटे ने घृणा द्रष्टि से पिता की ओर देखा और फिर से अपना खाने में लग गए।
बूढ़े पिता ने जैसे ही अपने हिलते हाथों से खाना खाना शुरू किया तो खाना कभी कपड़ों पे गिरता कभी जमीन पर ।
बहु चिढ़ते हुए कहा – हे राम कितनी गन्दी तरह से खाते हैं मन करता है इनकी थाली किसी अलग कोने में लगवा देते हैं , बेटे ने भी ऐसे सिर हिलाया जैसे पत्नी की बात से सहमत हो । उनका बेटा यह सब मासूमियत से देख रहा था ।
अगले दिन पिता की थाली उस टेबल से हटाकर एक कोने में लगवा दी गयी । पिता की डबडबाती आँखे सब कुछ देखते हुए भी कुछ बोल नहीं पा रहीं थी।
बूढ़ा पिता रोज की तरह खाना खाने लगा , खाना कभी इधर गिरता कभी उधर । छोटा बच्चा अपना खाना छोड़कर लगातार अपने दादा की तरफ देख रहा था ।
माँ ने पूछा क्या हुआ बेटे तुम दादा जी की तरफ क्या देख रहे हो और खाना क्यों नहीं खा रहे ।
बच्चा बड़ी मासूमियत से बोला – माँ मैं सीख रहा हूँ कि वृद्धों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप लोग बूढ़े हो जाओगे तो मैं भी आपको इसी तरह कोने में खाना खिलाया करूँगा ।
बच्चे के मुँह से ऐसा सुनते ही बेटे और बहु दोनों काँप उठे शायद बच्चे की बात उनके मन में बैठ गयी थी क्युकी बच्चा ने मासूमियत के साथ एक बहुत बढ़ा सबक दोनों लोगो को दिया था ।
बेटे ने जल्दी से आगे बढ़कर पिता को उठाया और वापस टेबल पे खाने के लिए बिठाया और बहु भी भाग कर पानी का गिलास लेकर आई कि पिताजी को कोई तकलीफ ना हो ।
*तो मित्रों , माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें लेकिन माँ बाप से बड़ा धन इस दुनिया में कोई नहीं है।*
*माँ बाप की हमेशा निस्वार्थ भाव से सेवा एवं इज्जत करिए, हम जैसा करेंगे वैसा ही हमें भी मिलेगा*
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