*जीवनदायिनी खारुन को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जिम्मेदार मौन*
फेक्ट्रीयो का केमिकल युक्त पानी नाले को प्रदूषित करते पहुच रहा खारुन तक
जीवनदायिनी खारुन को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जिम्मेदार मौन
सुरेन्द्र जैन धरसीवां
छोकरा नाला ही नही अपितु बोरझरा से होकर निकले नाले में भी औधौगिक इकाईयो का केमिकल युक्त पानी न सिर्फ नाले के पानी को गंदा कर रहा है अपितु आगे जाकर वह जीवनदायिनी खारुन नदी को भी प्रदूषित कर रहा है बाबजूद इसके जिम्मेदार मौन बने बैठे हैं....रायपुर से धनेली निमोरा चीख़ली होते हुए निकला छोकरा नाला जिस तरह मुरेठी में जाकर खारुन नदी में मिला है और आसपास की औधौगिक इकाइयां उसमे अपना केमिकल छोड़ती हैं जिससे लंबे समय से खारुन प्रदूषित हो रही है लेकिन कोई जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नही देता ठीक उसी तरह एक नाला बोरझरा बजरंग पावर नामक फेक्ट्री के समीप से निकला है जिस पर बोरझरा से आगे आवागमन को पुलिया भी बनी हुई है उक्त नाला बजरंग पॉवर के समीप से होते हुए आगे जाकर खारुन नदी में संगम हुआ है....जब इस नाले के पानी पर इस प्रतिनिधि की नजर पडी तो उक्त नाले का पानी पूरी तरह प्रदूषित दिखा एवं आसपास तेज बदबू भी आ रही थी कारण था फेक्ट्रियो का केमिकल युक्त पानी नाले के पानी मे केमिकल इतना अधिक था की पानी पर फैन बन रहा था और उसी के आसपास गौधन विचरण कर रहा था....स्थानीय ग्रामीणो ने बताया कि इस नाले में बजरंग पावर सहित कुछ फेक्ट्रियो का केमिकल युक्त पानी आने से यह इतना प्रदूषित है इसी में गांव के मवेशी भी निस्तारी करते है यही नाला आगे खारुन में मिला है जिससे खारुन नदी भी प्रदूषित हो रही है लेकिन कोई जिम्मेदार कुछ नही करता उधोग वाले लँबी पहुच वाले होते हैं इसलिए गांव वालों की कोई सुनवाई नही होती है सरकार किसी भी पार्टी की क्यों न हो लेकिन ग्रामीणो को वह बढ़ते प्रदूषण से कभी मुक्ति नही दिला पाई है एक तरफ चिमनियों के काले धुंए से वायु प्रदूषित तो दूसरी तरह केमिकल युक्त पानी से नदी नालों का जल प्रदूषित यानी उधोगो का प्रभाव इतना अधिक है कि न हवा शुद्ध बची है न पानी,बढ़ते प्रदूषण के बीच रहना ही ग्रामीणो की बन गई है जिंदगानी।
