सगाई करने की तैयारी थी लेकिन वहीँ पूरी शादी ही हो गई, बिल्कुल चट मंगनी पट ब्याह के तर्ज पर
सगाई करने की तैयारी थी लेकिन वहीँ पूरी शादी ही हो गई, बिल्कुल चट मंगनी पट ब्याह के तर्ज पर
जयलाल प्रजापति/नगरी
...वैश्वीविक महामारी कोरोना ने सिर्फ जनसंख्या कर आंकड़े और आर्थिक समीकरण ही नही बदले बल्कि सदियों पुरानी मान्यताओं को भी शायद हमारी डीएनए से निकालने की कोशिश की है, धमतरी जिले के नगरी में बीते दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब सिर्फ सगाई करने की तैयारी थी लेकिन वहीँ पूरी शादी ही हो गई, बिल्कुल चट मंगनी पट ब्याह के तर्ज पर।
ये मामला उस सामाजिक कुरीति को तोड़ने वाला भी है जिसमे, आन बान और शान के नाम पर बेेहिसाब फिजूल खर्ची की जाती है, क्योंकि अगर वैसा नही किया जाता तो समाज मे ताने झेलने पड़ते है, लेकिन नगरी में रहने वाले शिक्षक दंपति बी पी चंद्रा और शैल चंद्रा जो पेशे से व्याख्याता और प्राचार्य है, उन्होंने अपने बेटे पीयूष की शादी, फिंगेश्वर निवासी प्रज्ञा से तय की थी, इसी सिलसिले में सगाई करने कुछ रिश्तेदारो के साथ फिंगेश्वर गए थे, जहाँ समाज के लोगो ने कोरोना का हवाला देते हुए, शादी को बिना भीड़ भाड़ के करने की सलाह दी, चर्चा इसी दिशा में आगे बढ़ी और आखिर में फैसला हुआ कि, अभी, यही इसी वक्त ही शादी भी कर दी जाए, बस फिर क्या था, फौरन मंडप सज गया, पंडित बुला लिया गया, वर वधु ने अग्नि से 7 फेरे लिए और 7 जन्मों का साथ रहने की सौगंध ले ली, एक परिवार बस गया, ये निर्णय भले समाज को नाराज करने का खतरा मोल लेने वाला जरूर था, लेकिन महामारी के खतरे को खत्म करने वाला भी था, शादी में होने वाले फिजूल खर्च की परंपरा को तोड़ने वाला भी था, अब सभी इस शादी की मिसाल दे रहे है तारीफ कर रहे हैं, खुद दुल्हन प्रज्ञा भी इससे बेहद खुश है, और लड़के के माता पिता भी बेहद खुश है।



