*जीवन में चमत्कार चाहते हैं तो अंदर की आवाज सुने। सोभाग्यशाली वह है जिनके पास संपत्ति भी है और स्वास्थ भी है----ब्रहमा कुमार नारायण* भाई - fastnewsharpal.com
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*जीवन में चमत्कार चाहते हैं तो अंदर की आवाज सुने। सोभाग्यशाली वह है जिनके पास संपत्ति भी है और स्वास्थ भी है----ब्रहमा कुमार नारायण* भाई

 *जीवन में चमत्कार चाहते हैं तो अंदर की आवाज सुने। सोभाग्यशाली वह है जिनके पास संपत्ति भी है और स्वास्थ भी है----ब्रहमा कुमार नारायण* भाई 



अलीराजपुर,

,जीवन में सब कुछ होते हुए भी कभी-कभी हम कुछ अधूरापन अनुभव करते हैं, जिसकी तलाश हम बाहर की दुनिया में करते रहते हैं। चौबीसों घंटे बाहरी दुनिया को ही को देखते रहते हैं, जब अन्तर में देखने का मौका होता है, तो हम सो जाते है..।लेकिन आध्यात्मिकता हमें बताती है कि, 24 घंटे में एक बार भी थोड़ी देर के लिये अपने कानों को बंद करके शब्द धुन को सुनो और ध्यान करते समय अपने अन्तर में देखने की कोशिश करो...।

       पहले आँखों से ही शुरु करो, क्योंकि यही सबसे महत्वपूर्ण कर्मेंद्रीय है, जो हमें बाहर से जोड़े रखती है। फिर अपने भीतर में जो भी आवाज़ सुनाई पड़े, उसे सुनने की कोशिश करो। फिर तुम्हारे अन्दर चमत्कार हो उठेगा..।पहले तुम पाओगे कि कुछ तो है फिर तुम पाओगे कि बहुत कुछ है यहां तो, क्योंकि भीतर अपने ही सँगीत हैं और अपनी ही आवाज़ें हैं। भीतर के अपने ही रंग ही हैं।जिस दिन आपको भीतर के रंग दिखाई देंगे, उस दिन बाहर की दुनिया के सब रंग फीके पड़ जाएंगे।फिर तुम्हारी इच्छाएँ समाप्त हो जायेगी। तब संतोष और तृप्ति का भंडार मिल जाएगा। तुम्हारे अंदर की जिज्ञासा और प्रश्न स्वता ही समाप्त हो जाएंगे। बस इसी विधि का नाम ही राजयोग या मेडिटेशन है! यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी मार्ग पर स्तिथ ब्रहमा कुमारी सभागृह में *उड चले आकाश की ओर, चले खुशनुमा जीवन की ओर* , विषय पर अपने संबोधन में नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया कि

सफलता का मतलब हर आत्मा के लिये अलग-अलग होता है, इसलिये किसी की कोई सांसारिक उपलब्धि देख कर संसार की इस होड़ में शामिल मत होना क्योंकि प्राय देखा गया है कि,अपार साधनों, पद, मान_ सम्मान,सभी कुछ होने के बावजूद भी जीवन में कुछ कमी खलती रहती है, जो व्यक्ति को धीरे धीरे हताशा और निराशा की ओर ले जाती है!सफलता का वास्तविक अर्थ है,सच्ची खुशी व आनंद को प्राप्त करना,जो केवल सच्चे ज्ञान व ध्यान द्वारा ही संभव है!क्योंकि जब हम भाग्य शाली होते हैं,तो जीवन में सुख साधन प्राप्त होते हैं, लेकिन हम सौभाग्य शाली तब होते हैं,जब साधनों के साथ-साथ  प्राप्तियां भी हमारे स्वरूप में स्पष्ट दिखाई दे।।परम सौभाग्य शाली हैं वो,:-जिनके पास भोजन है, और भूख भी है।*जिनके पास मखमल की सेज तो है, और नींद भी है।।जिनके पास धन है, साथ में धर्म भी है।*जिनके पास सुन्दर रूप है, तो सुन्दर चरित्र भी है।*जिनके पास सम्पत्ति है, तो स्वास्थ्य भी है।जिनके घर में मन्दिर है, तो हृदय में भाव भी हैं।जिनके पास अच्छा व्यापार है, तो साथ में अच्छा व्यवहार भी है।"जिनके पास परिवार है, तो साथ में प्यार भी है।यदि यह सब आपके पास हैं, तो आप वास्तव में धनवान हैं, और सौभाग्य शाली है। कार्यक्रम के  आरंभ में ब्रहमा कुमारी ज्योति ,ब्रह्मा कुमारी माधुरी ,ब्रह्मा कुमारी एंजेल ने नारायण भाई का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मा कुमार लाल सिंह ने किया। अरुण सिंह गहलोत ने सभी का आभार यक्त किया।

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