आपकी सफलता की लाइन लंबी तब होगी, जब अपनी काबिलियत पर विश्वास होगा। हार को जीत में बदलने की ताकत है एक अच्छी सोच में--- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*
आपकी सफलता की लाइन लंबी तब होगी, जब अपनी काबिलियत पर विश्वास होगा। हार को जीत में बदलने की ताकत है एक अच्छी सोच में--- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*
अलीराजपुर
प्रत्येक इंसान में वे सब खूबियां है जो एक सफल इंसान में होनी चाहिये ।अधिकतर लोग दूसरो की सफलता के बारे सोचते है अपनी सफलता के बारे नहीं सोचते।
जब आप अपनी काबलियत पर ध्यान देंगे तब दूसरो की काबलियत छोटी दिखाई देगी और आप की सफलता की लाइन सब से लम्बी होगी। यह विचार माउंट आबू से पधारे धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने दीपा की चौकी में स्थित ब्रम्हाकुमारी के सभागृह में नगर वासियों को *सफलता का बीज अपने विचारों में है* इस विषय पर संबोधित कर रहे थे। आप ने आगे बताया कि अधिकतर लोग यह समझते है कि उन के पास वह खूबियां, काबलियत, हुनर नहीं है, जिस की वजह से सफलता प्राप्त की जा सकती है । सफलता पाने की सोचने के बजाय खुद को पहले से ही असफल मान लेते है जिस के परिणाम स्वरूप वह असफल हो जाते है । इस लिये कहा गया है जो जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है ।आप वह सब चीजे पा सकते है, उस ऊँचाई तक पहुँच सकते है, उस उपलब्धि को पा सकते है जिसे आप पाना चाहते है । सिर्फ इन्हे पाने लिये अपनी सोच बदलो ।पृथ्वी के गर्भ में बहूमूल्य खनिज छिपे हुये है, बाहर से दिखाई नहीं देते फिर भी उन्हे हम ढूंढ निकालते है ।मनुष्य का मस्तिष्क भी एक खान है । इस में हर प्रकार के खजाने छिपे हुये है । इन खजानों को प्राप्त करने के लिये सिर्फ अपनी सोच बदलने की जरूरत है ।आप की प्रबल इच्छा, आप की कोशिश, आप की महत्व आकांक्षा, आप का जनून आप को इस काबिल बनाता है कि आप मनचाही चीज़ प्राप्त करें ।
मस्तिष्क एक उपजाऊ जमीन है । सकारात्मक विचार बोने पर सफलता, सुख, खुशी मिलती है । बुरे विचार बोने पर निराशा, असफलता, दुख और परेशानी मिलती है ।आप जो कुछ भी कर रहे है और जितनी शक्ति से कर रहे है, उस से करोडो गुणा शक्ति आप के अन्दर छिपी पड़ी है । इस शक्ति को देख नहीं सकते, कल्पना नहीं कर सकते और ना ही तस्वीर खींच सकते है ।सोच में कई परमाणु बॉम्ब जैसी ताकत है । वह आप में ऊर्जा भर सकती है । असफलता को ब्लास्ट कर सकती है । दुनियां की हर चीज़ को प्राप्त कर सकते हैं। आप खुद तय करते हैं की आप को शिखर पर जाना है या गर्त में जाना हैं. । सोच ही स्वर्ग को नरक और नरक को स्वर्ग बना देती हैं ।
मिस्र के पिरामिड, चीन की दीवार, ताजमहल हो या रेडियो, टी वी, मोबाइल, कंप्यूटर वा चाँद पर पहुंचना ये सब मनुष्य की सोच का कमाल हैं ।मिलटन और सूरदास अंधे थे,बिथोवन बहरे थे, चर्चिल हकलाते थे,सुकरात की पत्नियों ने उसे आजीवन परेशान रखा, फिर भी उन्होने दुनियां को अलग कर के दिखाया ।अपनी डिक्शनरी में 'मुश्किल' शब्द को हटा दो। कभी भी सधारण बातचीत में मुश्किल शब्द प्रयोग नहीं करना । इसके स्थान पर चैलैनज शब्द प्रयोग करो । तो सफलता आपके पीछे पीछे चली आएगी। कार्यक्रम में समाजसेवी मदन परवल, अरुण गहलोत , डॉक्टर कन्हैया लाल गुप्ता, हलसिंह भी उपस्थित थे ।