आज का सुविचार(चिन्तन)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..30-10-2021*..🎋
✍🏻किसी का सरल स्वभाव उसकी कमज़ोरी नहीं होता है, संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं है, किन्तु उसका बहाव बड़ी से बड़ी चट्टान के भी टुकड़े कर देता है।
💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar*
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻जिंदगी को गमले के पौधे की तरह मत बनाईये जो थोड़ी सी धूप लगने पर मुरझा जाये, जिंदगी को जंगल के पेड़ की तरह बनाइये जो हर परिस्तिथि में मस्ती से झूमता रहे।
🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹
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*दीपावली का आध्यात्मिक रहस्य*
*दीपावली दीपकों को show करता है, एक नई सुबह को show* करता है, नए उजाले को। *दीपक कब जगाया जाता है?* जब *अंधियारी रात होती है तब दीपक जगाया जाता। जब तक अंधेरा नहीं होता है तब तक दीपक की value नहीं होती है। उससे पहले [सोझरा] दिन होता है, तो अगर आप दीपक जगा भी दोगे तो वो दिखाई नहीं देता है।* *उसी तरह से जब काली रात होती है , अमावस्या की रात होती है जिसमें चंद्रमा* भी मद्धम होता है यानी कि तब दीपक जलाया जाता है।
दीपक माना हमारे अंदर का दीपक यानी कि कलियुग के अंत मै जब *आत्मा अपना परिचय भूल जाती है तब परमात्मा आकर हमारा दीपक जलाते* *ज्ञान का घृत डालते हैं, याद की शक्ति देते हैं जिससे हमारा दीपक फिर से जग जाता है।*
तो *यह दीपक से दीपक, दीपक से दीपक जग जाने को दीपावली कहा जाता* है। *बाबा जब हमारे समुख आते हैं, दीपको की माला बन जाती है तो अंधेरा है अज्ञानता का और रोशनी है ज्ञानता की। जब हम आत्मायों को ज्ञान मिलता है तब जाकर हमारी आत्मा का तीसरा नेत्र खुलता है यानी हमारा दीपक जगता है। इसीलिए भक्ति मार्ग में इसका आध्यात्मिक अर्थ ना समझते हुए स्थूल में दीपक जगाने की परंपरा बना दी गई है।
*सबसे पहले* 💎🎊🎊💎✨♻️💰💰💰💰💰 *धनतेरस* आती है। धनतेरस माना *जब तन-मन-धन सब हम तेरा कर देते हैं, तो उसे धनतेरस कहते हैं।* धनतेरस पर अपने घर में नया बर्तन लेकर आते हैं। माना कि एक ऐसा बुद्धि रुपी बर्तन जिसमें हम ज्ञान धन डालेंगी तभी तो हम धन-तेरस करेंगे यानी कि अपने आपको समर्पित करेंगे। जब हम "सब कुछ" तेरा कर देते हैं, तब हमारी धनतेरस हो सकती है। 🪔🪙🪙🪙🪙🪙🎊🎉🎊🎉🎊उसके बाद आती है छोटी दिवाली माना जब छोटे दीपक जगते हैं ।ऐक घर मे ऐक ज्ञानी । 🪔🕯️🪔🕯️🪔उसके बाद बडी दीपावली चारों तरफ रोशनी हो जाती है। जिसे कहते हैं कि राम राज्य आ गया। तो यह तो आना ही है! तभी तो सतयुग आएगा। तो यह सतयुग की निशानी है। सभी की आत्म ज्योति जगना।
🔸उसके बाद coronation day होता है, यानी की जब श्री लक्ष्मी-नारायण अपनी राजगद्दी पर बैठ जाते हैं। जिसके लिए विश्वकर्मा एक नए विश्व का निर्माण करता है क्योंकि दीपावली पहले मनाई जाती है, विश्व का निर्माण बाद में होता है।
🔸फिर उसके बाद तिलक लगता है जिसे भाई दूज कहा जाता है, माना हर दूसरी आत्मा भाई। आप एक ही घर से आए हैं, तो आत्मा भाई-भाई है।
यह स्मृतियाँ सिर्फ इन 5 दिनों की नहीं हैं, यह हमार पुरुषोत्तम संगमयुग के लिए हैं। हमने पुरुषोत्तम संगमयुग का हर दिन जिया है। हर दिन मनाया है इसलिए पूरा भारत वर्ष और पूरे भारतवासी यह दीपावली के त्यौहार को इतनी धूमधाम से मनाते हैं और बहुत खुश होते हैं। जैसे दीपावली का मौसम आता है तो सबको इतनी उमंगे आ जाती है कि सब अपने घर में सफाइयाँ भी करते हैं, महालक्ष्मी का पूजन भी करते हैं जिसमें गणेश का साथ भी होता है। तो माना महालक्ष्मी का पूजन, गणेश का साथ, माना शुभ और लाभ, यह सब appropriate एक साथ में जुड़ा हुआ है और यह सब संगमयुग के ही लक्षण हैं। अब महालक्ष्मी का पूजन होता है तो माना नारायण भी साथ में हैं।
कहते हैं दीपावली पर लक्ष्मी जी आती हैं, तो लक्ष्मी जी पहले पूरी स्वच्छता भी चाहती हैं, तभी उस धरनी पर अपना पांव रखेगी। तो ऐसे संस्कार अगर हमारे बन जाए कि हम चारों तरफ की तमोप्रधानता की सफाई कर दें, तो हमारे पास लक्ष्मी ही लक्ष्मी होगी, क्योंकि तब सतयुग आ जाएगा! तो महालक्ष्मी का राज्य तो चलेगा ना!
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